प्रभुधर्म की विजय (#8367)

गुणगान हो तेरे नाम का, हे स्वामी, मेरे ईश्वर! समस्त भू पर अंधियारा छा गया है और सभी राष्ट्रों को दुष्ट शक्तियों ने घेर लिया है। इसमें भी मैं तेरे विवेक को और पाता हूँ तेरे विधान की चमक देखता हूँ।
वे जो तुझसे दूर आवरण में लिपटे हैं, उन्होंने समझ लिया है कि उनमें तेरे प्रकाश को बुझा देने की और तेरी अग्नि को मिटा देने की और तेरी कृपा के पवन झकोरों को रोक लेने की शक्ति है, किन्तु नहीं, तेरी प्रभुता मेरी साक्षी है यदि प्रत्येक विपदा तेरे विवेक और प्रत्येक अग्नि-परीक्षा तेरे मंगल-विधान का संवाहक नहीं बनाई गई होती तो हमारा विरोध करने का साहस कोई भी नहीं दिखाता, भले ही धरती तथा आकाश की समस्त शक्तियाँ हमारे विरूद्ध उठ खड़ी होतीं। यदि मैं तेरे विवेक के अद्भुत रहस्यों को, जो मेरे सम्मुख खुले पड़े हैं, प्रकट कर देता तो तेरे शत्रुओं के साम्राज्य विदीर्ण हो जाते। अतः, गुणगान हो तेरे नाम का, हे मेरे ईश्वर! मैं तुझसे याचना करता हूँ, तेरे परम महान नाम से कि जो तुझसे प्रेम करते हैं, उन्हें अपने उस विधान के चतुर्दिक एकत्र कर जो तेरी इच्छा की कृपा से प्रवाहित हुआ है और उनके लिये वह भेज जो उनके हृदयों को आश्वस्त करे।
 तू जैसा चाहे वैसा करने में समर्थ है। सत्य ही तू संकट में सहायक, स्वयंजीवी है।

-Bahá'u'lláh
-----------------------

प्रभुधर्म की विजय (#8360)

गुणगान हो तेरा, हे स्वामी, तूने अपने आदेश की शक्ति से समस्त सृजित वस्तुओं को अस्तित्व दिया है।
हे स्वामी! तेरे अतिरिक्त जिसने अन्य सब कुछ को त्याग दिया है, उसकी सहायता कर और उसे विजय प्रदान कर। हे स्वामी, अपने सेवकों की सहायता करने के लिये, उन्हें सहयोग और सहायता प्रदान करने के लिये, उन्हें महिमा से आच्छादित करने के लिये, उन्हें सम्मान एवं उच्चता प्रदान करने के लिये, उन्हें समृद्ध बनाने के लिये और अद्भुत विजय के द्वारा उन्हें विजयी बनाने के लिये, देवदूतों को भेज जो आकाश और धरती पर तथा जो इनके मध्य में है।
तू उनका स्वामी है, धरती और आकाश का स्वामी है और समस्त लोकों का स्वामी है। हे ईश्वर, अपने सेवकों की शक्ति के माध्यम से इस धर्म को शक्तिशाली बना और संसार के सभी जनों पर प्रभावशाली होने में उनकी सहायता कर; क्योंकि, वे सत्य ही, तेरे ऐसे सेवक हैं जिन्होंने स्वयं को तेरे अतिरिक्त अन्य सभी कुछ से अनासक्त कर लिया है और तू सत्य ही, सच्चे सेवकों का रक्षक है।
हे स्वामी, अनुदान दे कि तेरे परम पावन धर्म के प्रति अपनी निष्ठा के माध्यम से उनके हृदय, उन सभी वस्तुओं से अधिक शक्तिशाली बन जायें, जो आकाश में और धरती पर है, तथा जो कुछ भी इनके मध्य है, हे स्वामी, अपनी अद्भुत शक्ति के चिन्हों से उनके हाथों को सशक्त बना ताकि वे समस्त मानवजाति के समक्ष तेरी शक्ति को प्रकट कर सकें।

-The Báb
-----------------------

प्रभुधर्म की विजय (#8363)

हे स्वामी, अपनी दिव्य एकता के वृक्ष के शीघ्र विकास का विधान कर। हे स्वामी, अपनी सुप्रसन्नता की जलधार से इसे सींच और अपने दिव्य आश्वासन के प्रकटीकरण से इससे ऐसे फल उपजा जैसा तू अपने गुणगान एवं महिमागान के लिये, अपनी स्तुति और आभार के लिये, अपने नाम की स्तुति के लिये, अपने सारत्व की एकता के लिये और अपनी उपासना में समर्पण के लिये चाहता है! सभी कुछ तेरी मुट्ठी में है। परम सौभाग्यशाली हैं वे जिनके रक्त का तूने अपने अस्तित्व के वृक्ष को सींचने के लिये और अपनी पावन और अतुलनीय वाणी को यशस्वी बनाने के लिये चुना है।

-The Báb
-----------------------

प्रभुधर्म की विजय (#8365)

हे स्वामी! धरती के समस्त जनों को अपने धर्म के स्वर्ग में प्रवेश पाने योग्य बना, ताकि अस्तित्व में आया कोई भी प्राणी, तेरी सुप्रसन्नता की परिधि से बाहर न रह जाये।
अनन्तकाल से तू, वह करने में समर्थ रहा है जो तू चाहता है और तू अपनी इच्छा से परे है।

-The Báb
-----------------------

प्रभुधर्म की विजय (#8368)

वह ईश्वर है! हे स्वामी, मेरे ईश्वर, मेरे परम प्रियतम! ये तेरे वे सेवक हैं जिन्होंने तेरी पुकार सुनी है, तेरी वाणी, तेरे आह्वान पर ध्यान दिया है और विश्वास किया है; ये साक्षी रहे हैं तेरी अद्भुत लीला के, इन्होंने तेरे प्रमाणों को और पुष्ट किया है तेरे साक्ष्यों को स्वीकारा है; तेरे मार्गदर्शन का अनुसरण किया है, और जाना है तेरा रहस्य, और पाया है मंत्र तेरे ग्रंथ का; तेरी पातियों का स्रोत पाया है, तेरे संदेशों का भाव और तेरे प्रकाशन और भव्यता के परिधान का आंचल दृढ़ता से थाम लिया है; जिनके पग तेरी संविदा में अडिग हैं, तेरे प्रमाण में उनके हृदय दृढ़ हैं।
स्वामी! तू उनके हृदय में अपने दिव्य आकर्षण की लौ को प्रज्वलित कर दे और वरदान दे कि प्रेम और ज्ञान का पंछी उनके हृदय में चहके। वर दे कि वे तेरे ऐसे समर्थ चिन्ह बनें, ऐसी जगमगाती ध्वजायें बनें व परिपूर्णता को प्राप्त हों जैसे तेरे शब्द परिपूर्ण हैं। तू अपना धर्म उनके माध्यम से उन्नत कर, अपनी धर्म-ध्वजा और दूर-दूर तक फहरा, अपनी अद्भुत लीला का विस्तार कर। अपनी वाणी को उनके माध्यम से विजयी बना और अपने प्रियजनों के मेरूदंड सशक्त कर। उनकी वाणी को अपने गुणगान के लिये मुक्त कर, उन्हें तू अपनी पावन इच्छा के पालन के लिये प्रेरित कर। अपने पावन साम्राज्य में उनके मुखड़ों को आलोकित कर और अपने धर्म की विजय के लिये उठ खड़े होने में उनकी सहायता करके उनका आनन्द बढ़ा। स्वामी, हम निर्बल हैं, हमें अपनी पावनता की सुरभि का प्रसार करने की शक्ति दे; हम दरिद्र हैं, अपनी दिव्य एकता के कोष से हमें समृद्ध बना; हम परिधानहीन हैं, अपनी कृपा के परिधान हमें धारण करा; हम पापी हैं, अपनी कृपालुता, अनुग्रह और क्षमाशीलता से हमारे पापों को क्षमा कर। सत्य ही, तू ही सम्बल देने वाला, सहायक, कृपालु, सामर्थ्‍यशाली और शक्तिशाली है। महिमाओं की महिमा उन पर विराजे, जो दृढ़ और अटल हैं।

-`Abdu'l-Bahá
-----------------------

